हनुमान जी और वृद्ध महिला की अनोखी कहानी | The unique story of Hanuman ji and the old woman
यह कहानी एक छोटे से गाँव की वृद्ध महिला, गंगा माई की है, जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर थीं। गंगा माई के पास ना परिवार था और ना ही संपत्ति, लेकिन उनका हृदय हनुमान जी की भक्ति से भरा हुआ था। वह हर सुबह एक पुराने, वीरान हनुमान मंदिर में जाकर उनकी मूर्ति को साफ करतीं, तुलसी के पत्ते अर्पित करतीं, और राम नाम का जाप करतीं।
गंगा माई की परीक्षा
गाँव में एक दिन बड़े ज़मींदार का आदमी आया और मंदिर की जमीन पर अपना अधिकार जताने लगा। उसने मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया ताकि वहाँ एक बड़ा गोदाम बनाया जा सके। गंगा माई ने इस निर्णय का विरोध किया और कहा, “यह भूमि हनुमान जी की है। इसे कोई छू नहीं सकता।”
ज़मींदार ने गंगा माई की बात पर ध्यान नहीं दिया और अगले दिन मंदिर तोड़ने के लिए अपने मजदूर भेज दिए। गंगा माई ने पूरी रात हनुमान जी से प्रार्थना की, “हे बजरंग बली, अगर आप इस मंदिर को बचा सकते हैं, तो कृपया अपनी शक्ति दिखाइए। मैं बूढ़ी हूँ, लेकिन आपके लिए प्राण भी दे सकती हूँ।”
हनुमान जी का चमत्कार
अगले दिन सुबह मजदूर मंदिर तोड़ने पहुँचे। जैसे ही उन्होंने पहला औजार उठाया, वहाँ एक भीषण गर्जना हुई। आसमान में काले बादल छा गए, और एक विशाल वानर मंदिर के द्वार पर प्रकट हुआ। उसकी आँखें अंगारों जैसी चमक रही थीं, और उसकी गरज से पूरा गाँव काँप गया।
मजदूर डर के मारे भाग खड़े हुए। ज़मींदार ने जब यह सुना, तो वह खुद मंदिर देखने आया। जैसे ही उसने वानर को देखा, वह घुटनों के बल गिर पड़ा और गंगा माई से माफी माँगने लगा।
गंगा माई का सम्मान
उस घटना के बाद ज़मींदार ने अपनी सारी जमीन मंदिर को दान कर दी। गंगा माई का सम्मान पूरे गाँव में बढ़ गया। लोगों ने मंदिर को फिर से बनवाया और उसका नाम रखा “शक्ति स्वरूप हनुमान मंदिर।”
हनुमान जी का आशीर्वाद
गंगा माई ने अपने शेष जीवन में हनुमान जी की सेवा की और लोगों को भक्ति का मार्ग दिखाया। उनकी मृत्यु के समय, गाँव वालों ने देखा कि हनुमान जी की मूर्ति से एक दिव्य प्रकाश निकला और गंगा माई के पार्थिव शरीर पर पुष्प वर्षा हुई।
कहानी का संदेश
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चे भक्त के प्रति भगवान कभी भी उदासीन नहीं रहते। जब संकट सबसे बड़ा होता है, तब भगवान का चमत्कार हमारे जीवन में उजाला
करता है।

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