Skip to main content

घर में बरकत क्यों नहीं होती? इसकी क्या वजह है? घर में बरकत न होने के कारण:

 घर में बरकत (सुख-समृद्धि और शांति) न होने के पीछे आध्यात्मिक, मानसिक और व्यवहारिक कई कारण हो सकते हैं। भारतीय धर्मग्रंथों और परंपराओं में इसे सुधारने के उपाय भी बताए गए हैं। यहाँ मुख्य कारण और उनके समाधान दिए गए हैं:




घर में बरकत न होने के कारण:


1. नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव


घर में झगड़े, ईर्ष्या, क्रोध, और अशांति का माहौल होने से सकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।


वास्तु दोष, गंदगी, या घर का अशुद्ध वातावरण भी बरकत में बाधा डालता है।



2. सद्गुणों और आध्यात्मिकता की कमी


धर्म, सत्य, और सच्चाई से दूर रहना, या पूजा-पाठ में कमी होना।


भगवान को याद न करना और अधर्म के मार्ग पर चलना।



3. धन का गलत उपयोग


अगर धन का उपयोग विलासिता, गलत आदतों या अन्यायपूर्ण कार्यों में किया जाता है, तो बरकत नहीं होती।



4. दान और सेवा का अभाव


दूसरों की मदद न करना, जरूरतमंदों की सेवा से दूर रहना।



5. अहंकार और लोभ


अधिक लोभ, धन का अनावश्यक संचय और दूसरों के प्रति अहंकार घर की शांति को भंग कर देता है।



6. कर्मों का प्रभाव


वर्तमान या पिछले जन्मों के बुरे कर्मों का असर भी घर में बरकत को रोक सकता है।




घर में बरकत लाने के उपाय:


1. धार्मिक उपाय


प्रतिदिन पूजा-पाठ: सुबह और शाम घर में पूजा करें।


भगवान का नाम जप: विष्णु जी, लक्ष्मी जी और हनुमान जी का स्मरण करें।


वास्तु दोष दूर करें: घर में मुख्य द्वार और पूजा स्थल को साफ और शुभ दिशा में रखें।


श्रीसूक्त का पाठ: शुक्रवार को लक्ष्मी जी का श्रीसूक्त पाठ करें।



2. सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें


घर को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखें।


दरवाजे पर हल्दी और कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं।


घर में तुलसी का पौधा लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें।



3. दान और सेवा


हर महीने जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या धन दान करें।


गौमाता की सेवा करें।



4. अच्छे कर्म और सच्चाई


अपने व्यवहार में सच्चाई और विनम्रता रखें।


दूसरों को धोखा न दें और ईमानदारी से कमाई करें।



5. संस्कारों को अपनाएं


परिवार में एकता और प्रेम बनाए रखें।


बड़ों का आदर करें और बच्चों को अच्छे संस्कार दें।



6. हनुमान जी और शिवजी की आराधना


मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें और सुंदरकांड का पाठ करें।


सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।



7. धन और समय का सदुपयोग


धन का सही जगह उपयोग करें।


बचत के साथ धर्म और परोपकार में खर्च करें।





श्रीकृष्ण का संदेश:


गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं:

"धर्म, सच्चाई, और परोपकार से ही घर में

 सुख-शांति और बरकत आती है।"

इसलिए, जीवन में सद्गुण, धर्म, और संयम को अपनाकर ही घर में बरकत लाई जा सकती है।


Comments

Popular posts from this blog

वीरवार का व्रत: सुख, समृद्धि और शांति पाने का मार्ग, वीरवार व्रत की विधि, वीरवार व्रत की कथा,व्रत के नियम और सावधानियाँ,

 Home. वीरवार का व्रत: सुख, समृद्धि और शांति पाने का मार्ग वीरवार, जिसे गुरुवार के रूप में भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति और धर्म में एक विशेष दिन माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि वीरवार का व्रत करने से सुख, समृद्धि, शांति, और ज्ञान की प्राप्ति होती है। आइए इस ब्लॉग पोस्ट में वीरवार के व्रत की महिमा, कथा, विधि, और इसके पीछे छुपे धार्मिक महत्व को विस्तार से समझें। 1. वीरवार व्रत की महिमा वीरवार का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है, जो अपने जीवन में आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं या जिनके घर में खुशहाली और शांति नहीं है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति से करता है, उसके जीवन में धन-धान्य, सुख-शांति और उन्नति का वास होता है। 2. वीरवार व्रत की कथा वीरवार व्रत की कथा प्राचीन काल से प्रचलित है। कथा के अनुसार, एक समय की बात है, एक गरीब ब्राह्मण महिला बहुत परेशान रहती थी। एक दिन भगवान विष्णु ने उसकी मदद के लिए प्रकट होकर उसे वीरवा...

Chhath Puja 2024: नहाय खाय से लेकर सूर्योदय अर्घ्य तक, छठ पूजा में इन चीजों को जरूर करें शामिल

 Chhath Puja 2024: नहाय खाय से लेकर सूर्योदय अर्घ्य तक, छठ पूजा में इन चीजों को जरूर करें शामिल छठ पूजा का महापर्व निष्ठा, समर्पण और पवित्रता के साथ सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्रतीक है। इस पर्व के दौरान, चार दिनों तक कठोर नियमों का पालन किया जाता है, और भक्तगण व्रत रखकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यहां हम जानेंगे कि 2024 के छठ पूजा में कौन-कौन सी चीजों का महत्व है और किन चीजों को शामिल करना शुभ माना जाता है: 1. नहाय-खाय छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। पहले दिन घर को साफ-सुथरा किया जाता है, और भक्त गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं। इस दिन कद्दू-भात का भोजन तैयार किया जाता है, जो सात्विक और शुद्ध होता है। 2. खरना खरना छठ पूजा का दूसरा दिन है, जब दिनभर का व्रत रखा जाता है और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का सेवन किया जाता है। इसके बाद व्रती निर्जला उपवास रखते हैं। यह दिन पवित्रता और त्याग का प्रतीक है, और इस दिन के बाद से व्रत की कठिनाई और बढ़ जाती है। 3. संध्या अर्घ्य तीसरे दिन संध्या अर्घ्य का आयोजन होता है। इस दिन व्रती नदी या तालाब किनारे सूर्...

गणेश जी और चंद्रदेव की कथा |चंद्रदेव का उपहास और गणेश जी का क्रोध , Story of Ganeshji and Chandradev | Mockery of Chandradev and anger of Ganeshji

 Home 🏡 Radha Geet blog. गणेश जी और चंद्रदेव की कथा |चंद्रदेव का उपहास और गणेश जी का क्रोध  Click here Radha Geet blog  Radha Geet YouTube channel video dekhe:  click to link  यह कथा उन दिनों की है जब गणेश जी को मोदक (लड्डू) बहुत प्रिय थे। एक बार गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को उनके भक्तों ने ढेर सारे मोदक का भोग लगाया। गणेश जी ने प्रेमपूर्वक सारे मोदक खा लिए, और उनका पेट बहुत बड़ा हो गया। उन्होंने सोचा कि अब उन्हें थोड़ा टहलना चाहिए ताकि पाचन ठीक रहे। गणेश जी अपने मूषक (चूहे) पर सवार होकर वन में भ्रमण करने लगे। लेकिन उनके भारी शरीर के कारण मूषक थोड़ा लड़खड़ाने लगा। तभी अचानक मूषक ने एक सांप को देखा और डरकर भागने की कोशिश में गणेश जी को गिरा दिया। गणेश जी धूल में गिर गए, और उनके पेट के सारे मोदक चारों ओर बिखर गए। चंद्रदेव का उपहास Radha Geet blog  यह सब आकाश से चंद्रदेव देख रहे थे। जैसे ही उन्होंने गणेश जी को गिरते हुए और मोदकों के साथ संघर्ष करते देखा, वे जोर-जोर से हंसने लगे। चंद्रदेव का उपहास सुनकर गणेश जी बहुत क्रोधित हो गए। गणेश जी ने चंद्रदेव को घ...